भागवत गीता
श्रीमद्भगवद्गीता के अमृत वचन
श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के भीष्म पर्व का एक भाग है जिसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया दिव्य ज्ञान है। गीता जीवन के हर पहलू पर मार्गदर्शन प्रदान करती है।
18 अध्याय
अर्जुन विषाद योग
47 श्लोक
सांख्य योग
72 श्लोक
कर्म योग
43 श्लोक
ज्ञान कर्म संन्यास योग
42 श्लोक
कर्म संन्यास योग
29 श्लोक
आत्मसंयम योग
47 श्लोक
ज्ञान विज्ञान योग
30 श्लोक
अक्षर ब्रह्म योग
28 श्लोक
राज विद्या राज गुह्य योग
34 श्लोक
विभूति योग
42 श्लोक
विश्वरूप दर्शन योग
55 श्लोक
भक्ति योग
20 श्लोक
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
35 श्लोक
गुणत्रय विभाग योग
27 श्लोक
पुरुषोत्तम योग
20 श्लोक
दैवासुर सम्पद विभाग योग
24 श्लोक
श्रद्धात्रय विभाग योग
28 श्लोक
मोक्ष संन्यास योग
78 श्लोक
प्रसिद्ध श्लोक
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
जो मुझ परमेश्वर की शरण में आता है, उसे मैं कभी नहीं त्यागता।
— श्री कृष्ण
