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वेद & पुराण

सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथों का ज्ञान - चार वेद और अठारह पुराण

चार वेद

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ऋग्वेद

10,552 मंत्र

ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद है जिसमें देवताओं की स्तुति में रचित 10,552 मंत्र (ऋचाएं) हैं। यह 10 मंडलों में विभाजित है और इसमें सृष्टि, यज्ञ, और देवताओं के गुणगान शामिल हैं।

सूक्त (स्तोत्र)मंडलदेवता स्तुतिदार्शनिक विचार
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यजुर्वेद

1,975 मंत्र

यजुर्वेद यज्ञ कर्म विधि से संबंधित है। इसमें यज्ञ के मंत्र और अनुष्ठान विधियां हैं। यह दो शाखाओं में विभाजित है - शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद।

यज्ञ विधिअनुष्ठान मंत्रकर्म कांडआहुति विधान
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सामवेद

1,875 मंत्र

सामवेद संगीत का वेद है। इसके मंत्रों को विशेष स्वरों में गाया जाता है। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल स्रोत माना जाता है।

संगीत स्वरगायन विधिसोम यज्ञ गानराग परंपरा

अथर्ववेद

5,977 मंत्र

अथर्ववेद में आयुर्वेद, तंत्र, रोग निवारण मंत्र, और दैनिक जीवन से संबंधित ज्ञान है। इसे ब्रह्मवेद भी कहा जाता है।

आयुर्वेद ज्ञानरोग निवारणगृह शांतिलोक कल्याण

प्रमुख पुराण

पुराण सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथ हैं जिनमें देवताओं की कथाएं, सृष्टि का इतिहास, और धार्मिक शिक्षाएं हैं। कुल 18 महापुराण हैं।

विष्णु पुराण

भगवान विष्णु की महिमा, सृष्टि उत्पत्ति, और धर्म का विस्तृत वर्णन।

शिव पुराण

भगवान शिव की लीलाओं, शिवलिंग पूजा, और शैव धर्म का ज्ञान।

भागवत पुराण

श्री कृष्ण की लीलाओं का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ, भक्ति का सार।

मार्कण्डेय पुराण

दुर्गा सप्तशती और देवी महात्म्य का मूल स्रोत।

गरुड़ पुराण

मृत्यु के बाद का जीवन, कर्म फल, और मोक्ष का ज्ञान।

ब्रह्म पुराण

सृष्टि की उत्पत्ति, तीर्थ स्थलों का वर्णन, और धार्मिक अनुष्ठान।

स्कंद पुराण

सबसे बड़ा पुराण, कार्तिकेय की कथाएं और तीर्थ महात्म्य।

वामन पुराण

भगवान विष्णु के वामन अवतार की महिमा और लीलाएं।

वेदों का ज्ञान अनंत है, जो जितना गहरे उतरता है, उतना ही अधिक पाता है।

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